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उम्मीद
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उम्मीद 33 : टीना के कॉलेज जाने की तैयारी में पूरा परिवार इमोशनल हुआ

टीना के कॉलेज जाने का समय ज्यों-ज्यों करीब आ रहा है, मम्मी की मोहब्बत बढ़ती जा रही है। वे हर छोटी-बड़ी चीज का ध्यान रख रही हैं। वे सब कुछ कर रही हैं, जो अब तक नहीं कर पाई थीं। मम्मी के लगातार चल रहे इस प्रयास से टीना भी बेहतर महसूस कर रही है।
मम्मी धीरे-धीरे कॉलेज जाने की तैयारियाँ भी गुपचुप शुरू कर चुकी हैं। लिस्ट बना लिया है उन्होंने। उसमें रोज कुछ न कुछ नया जोड़ देती हैं। बाजार जाने पर उस सूची से कुछ न कुछ सामान भी खरीद ला रही हैं।

वे टीना के कॉलेज की तैयारी कुछ ऐसे कर रही हैं, जैसे उसकी शादी हो। क्या खाएगी? क्या पहनेगी? कौन-कौन से जरूरी सामान हैं, जो टीना को हर हाल में देना चाहती हैं मम्मी। पैरासीटामॉल से लेकर सेनेट्री नैपकिन तक उनकी सूची में शामिल है। कपड़े खरीदकर आ चुके हैं। खाने-पीने की चीजें भी बनाई जा रही हैं। उनकी पैकिंग भी चुपचाप होती जा रही है। टीना के जाने के पहले एक पार्टी भी देने की योजना है। सूची मेहमानों की भी बन गई है। इस बीच सुरभि और टीना एक साथ काफी समय गुजार रही हैं।

टीना की मंशा उसे भी अपने साथ ले जाने की है लेकिन ढेरों दुश्वारियों के बीच पापा के सामने वह ऐसा प्रस्ताव भी नहीं रख पा रही है। क्योंकि उसे पता है कि बाहर जाने पर बड़ी रकम लगने वाली है। ऐसे में अरोड़ा साहब पशोपेश में पड़ सकते हैं। यह बात वह जानती है कि पापा उसकी बात हमेशा ही गंभीरता से लेते हैं। हालांकि उन्होंने सुरभि को पहले ही आश्वस्त किया है कि उसकी देखरेख में कोई कमी नहीं आने पाएगी। वह शहर के जिस कॉलेज में चाहेगी, दाखिला करा दिया जाएगा।
सुरभि, टीना का साथ छूटने से तकलीफ में है लेकिन वह जताना नहीं चाहती। उसे पता है कि टीना को जैसे ही पता चलेगा, वह दुःखी होगी और सुरभि ऐसा बिल्कुल नहीं चाहती। आखिर दोनों बचपन के दोस्त जो हैं। इसीलिए एक-दूसरे का खयाल भी रखते हैं। हाँ, अपनी माँ से जरूर सुरभि इस दुःख को बयां करती रहती है। माँ ने उसे बहुत समझाया है। उसने कहा-देख सुरभि, हमें यह बात समझनी होगी कि इस घर में तेरी माँ नौकरी करती है। टीना बिटिया, उसके पापा-मम्मी सब तुम्हें प्यार करते हैं। दुलारते हैं।

तुम्हारी सुविधाओं का ध्यान रखते हैं। हम निश्चित उनके एहसानमंद हैं लेकिन असलियत तो असलियत ही है। हर आदमी के लिए भगवान ने उसकी भूमिका तय करके रखी है। उसी हिसाब से चीजें दुनिया में चलती हैं। हम सब यहाँ केवल निमित्तमात्र हैं। टीना बिटिया को विदेश में पढ़ना दर्ज है इसलिए वे जा रही हैं। हम उन्हें खुशी-खुशी भेजेंगे। तुम यहीं रहकर पढ़ोगी और चली गई तो आखिर मेरा ख्याल कौन रखेगा? मेरी लोरी कौन सुनेगा? माँ से जिद कौन करेगा? मैं किसके लिए खाना बनाऊंगी ? और इस तरह की इमोशनल बातें करते हुए दोनों माँ-बेटी आपस में लिपट गईं। दोनों की आँखें नम हो गईं। फिर अचानक काम का ख्याल आते ही माँ मुँह धुलकर कोठी जाने लगी तो सुरभि भी दोस्त टीना के पास चल पड़ी। दोनों को दोस्तों से मिलने जाना था।
उधर, मिस्टर अरोड़ा भी बाहर से खुश और अंदर से डरे हुए हैं। यह जानने के बावजूद कि उनकी बेटी बहादुर है। वे माँ के पास बैठकर अपना डर साझा कर रहे थे। बोले-मम्मी, हमारी टीना समझदार तो है लेकिन अभी उम्र ही क्या है उसकी? कॉलेज में जाकर उसे कोई दिक्कत तो नहीं होगी? वह अपना ध्यान रख लेगी न? कभी घर से बाहर नहीं रही है और बेटी भी तो है, डर बना हुआ है। टीना की दादी ने पूछा-ये बता डरपोक। तुम्हें अपनी बेटी पर, परवरिश पर भरोसा नहीं है या कुछ और बात है।

जब तय कर लिया है कि बाहर जाकर पढ़ेगी तो अब खुद को और मुझे भी कमजोर क्यों बना रहे हो? जानते नहीं हो कि टीना मेरी कमजोरी बन चुकी है। अगर पूरा खानदान इस तरह से कमजोर हुआ तो बेटी जाने से पहले ही कमजोर पड़ जाएगी। देखो, सब तय कर लो। उसके सामने अब कोई भी जाहिलियत भरी बात नहीं करेगा। न तुम, न तुम्हारी बेगम, न ही मैं खुद। सुरभि से भी मैं बात करूँगी। इस समय घर का माहौल हर हाल में खुशनुमा रहना चाहिए।
वैसे मेरी नजर में टीना हम सबसे मजबूत है। फैक्ट्री में आए संकट से जिस तरह वह बहादुरी से निपटी है, उससे तुम भी निश्चिन्त हो सकते हो मिस्टर अरोड़ा। हमारी बेटी जहाँ कहीं भी जाएगी, नाम ही रोशन करेगी। वह नई पीढ़ी की होकर भी संस्कारों की बात करती है। निभाती भी है। दोस्तों के साथ उसकी हुड़दंग देख लो तो लगता है कि बिगड़ गई है। मैं मानती हूँ कि आज की पीढ़ी के लिए आदर्श है हमारी टीना। तुम तो उसे भेजने की तैयारी करो। और बीच-बीच में तुम लोग जाते रहना। या जब भी मौका मिले तो उसे वापस बुला लेना। चार साल तो यूँ कट जाएँगे। समय यूँ भी बहुत तेजी से भाग रहा है।
जी मम्मी, सहमत हूँ लेकिन हिंदुस्तानी बाप हूँ न। देख नहीं रही हो अपनी बहूरानी को। जब बिटिया पास में थी तो ध्यान नहीं रखा और जब उसके जाने की बारी आई है तो कैसे गुपचुप अच्छी वाली मम्मी बनने की कोशिश में हैं। खैर, भगवान परिवार को खुश रखें। बिटियारानी की पढ़ाई ठीक से हो। मुझे और कुछ नहीं चाहिए। मुझे यह भरोसा तो है कि टीना जो भी करेगी, अच्छा करेगी।