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आपने आज नया क्या सीखा?

दिनेश पाठक

आपने आज नया क्या सीखा? यह सवाल खुद से पूछिए और जवाब तलाशिए। आप जबरदस्त परिवर्तन महसूस करेंगे। समय ज्यादातर अच्छा ही होता है लेकिन समाज की संरचना कुछ ऐसी है कि हम समय को ख़राब और अच्छे में आसानी से बाँट लेते हैं| बचपन से सुनता आ रहा हूँ-समय बलवान होता है|प्रभु पर भरोसा करो, वे सब अच्छा करेंगे| अगर यह सब सच है तो तनिक तकलीफ में हम क्यों टूट जाते हैं?
मतलब साफ है कि सच जानते हुए भी हम स्वीकार नहीं करना चाहते| मैं देश की नई पीढ़ी से हरदम कहता हूँ कि जब भी आपको कष्ट महसूस हो तो सेना के जवानों की ओर एक बार जरुर देखें, जो माइनस तापमान में भी अडिग देश की रक्षा कर रहे हैं| बड़ी संख्या में युवा अनेक कारणों से गुस्से में है| पर, इस गुस्से का फायदा कम, नुकसान ज्यादा है| क्योंकि अब यह राजनीतिक मामला बन चुका है| मतलब फौरी तौर पर आपके वश में नहीं है|
आप तो वही करिए जो आपके बस में है|आप पढ़ाई कर सकते हैं| ज्ञान हासिल कर सकते हैं| भरोसा करिए बेरोजगारी के बीच में अच्छे लोगों की कमी बनी हुई है|स्किल्ड युवा नहीं मिल रहे हैं| 25 वर्षों से नौकरी देने के तजुर्बे के आधार पर मैं यह दर्ज कर पा रहा हूँ| किसी भी नौजवान के पास मुझसे असहमत होने का अधिकार है| पर, सच को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना समय की मांग है और नौजवानों को यही करना होगा|
अगर किसी भी विषय से आपने स्नातक की परीक्षा पास कर ली है और दो पेज हिंदी या अंग्रेजी में अपनी बात साफ़-सुथरे तरीके से नहीं लिख पाते हैं तो बंद करना होगा यह कहना कि आप ग्रेजुएट हैं| नौकरी सरकारी हो या गैरसरकारी| ज्ञान हर जगह चाहिए| सरकारी और निजी क्षेत्र में एक बुनियादी फर्क है| सरकारी में नौकरियां योग्य लोगों को मिल तो जाती हैं लेकिन इन्हें पाने में कई बार कई-कई बरस लग जाते हैं और निजी क्षेत्र में आज इंटरव्यू दिया| कई बार तुरंत तो कई बार हफ्ते भर में रिजल्ट हाथ में|
मैं युवाओं से कहूँगा कि आप सबसे पहले यह सुनिश्चित करिए कि ज्ञान हासिल करने का सिलसिला रुकने न पाए और यह रोज के आधार पर तय हो| मतलब सोने से पहले यह सुनिश्चित करिए कि आपने आज कुछ नया सीखा या नहीं| नहीं तो छोड़िए बिस्तर और थोड़ा ही सही सीखने के बाद सोइए। यह सिलसिला किसी भी उम्र में रुकना नहीं चाहिए| यह तभी संभव होगा जब हम अपनी कमजोरी को स्वीकार करेंगे।
क्लासरूम लर्निंग से अलग एक ज्ञान का महासागर सागर है, जिसके बिना नौकरियाँ हाथ नहीं आतीं| वह है-एप्टीटयूट, बिहैवियर, एटीटयूट, दुनिया की समझ, कम्युनिकेशन, कपड़े, जूते-मोज़े पहनने की समझ, खुद को किसी व्यक्ति या बोर्ड के सामने प्रस्तुत करने की समझ आदि| ये ज्ञान आपको स्वाध्याय से मिलने वाले हैं| यूट्यूब पर लाखों वीडियो पड़े हुए हैं, जिनके माध्यम से आप सहज ये सभी चीजें सीख सकते हैं|
वैसे तो सरकारी-निजी क्षेत्रों में अब कुछ ख़ास फर्क नहीं दिखता फिर भी अगर आपकी रूचि सरकारी सेवाओं में है तो सबसे पहले ज्ञान हासिल करते हुए निजी क्षेत्र में खुद को आजमाएँ| उसके बाद सरकारी में जाने का प्रयास करें|इससे आप न केवल अपना भला करेंगे बल्कि देश और समाज भी आपसे सीख सकेगा| कोशिश यही होनी चाहिए कि आप के कर्तव्यों से ज्ञान की लौ उठती रहे और आसपास के लोग रोशन होते रहें|
जय हिन्द

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