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उम्मीद
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उम्मीद 51 : दीपावली पर टीना संग भगनानी परिवार पहुँचा इंडिया

धनतेरस के दिन पहले टीना घर में घुसी और फिर पूरा भगनानी परिवार। घर में रौनक सी फैल गई। अरोरा ने वाइफ को आवाज दी। दादी ने टीना की आवाज सुनते ही पूजा खत्म कर दी। त्यौहार के मौके पर यह सरप्राइज़ अरोरा परिवार के दिल को भा गया। सब एक दूसरे को लिपट गए। कोई छोड़ने को तैयार नहीं। क्योंकि ऐसी कोई उम्मीद अरोरा परिवार ने नहीं की थी। वे तो बस टीना को दीपावली पर घर देखना चाहते थे।
कॉमन रूम में सब एक साथ जमीन पर बैठ गए। चाय, हंसी ठहाकों का दौर शुरू हो गया। अरोरा ने पूछा-भगनानी तुमने इतना बड़ा सरप्राइज़ कैसे छिपा लिया? गजब हाजमा है तुम्हारा भाई? इतनी बड़ी खुशी तुम सहज दबाए रहे। भाभी ने तो तीन दिन पहले बात भी की थी मुझसे लेकिन भनक तक नहीं लगने दी और हमारी टीना भी तुम्हारे इस प्लान में सहज शामिल हो गई। इसने भी कोई सुराग नहीं दिया। यह सुनते ही टीना सामने आई और कान पकड़कर माफ़ी माँगने लगी। उसने उठक-बैठक लगाना शुरू कर दिया। पापा उठे और बेटी को गले लगा लिया। बोले-नहीं बेटा। आपने गलती नहीं की है तो माफ़ी माँगने का सवाल ही नहीं उठता। यह सभा दो घण्टे तक चली। इस बीच में अरोरा ने स्टाफ को तैयारियाँ तेज करने को कह दिया। घण्टे भर में काम शुरू हो गया। शाम तक घर में दीपावली की रौनक दिखने लगी।
उधर टीना, सुरभि की ओर भागी। वह उदास घर में बैठी हुई थी। दो साल बाद टीना को सामने देख दोनों एक-दूसरे को निहारते रहे। फिर लिपट गए। दोनों की आँखों में आँसू थे। फिर दोनों ने अपने अपने आँसू छिपाने की नाकाम कोशिश की। एक-दूसरे के आँसू एक ही दुपट्टे से पोछे दोनों दोस्तों ने। सुरभि बोली-अब मनेगी दीपावली। हालाँकि आँगन में घर नहीं बन पाएगा लेकिन बाकी सभी काम होंगे।
सुरभि बोली। फिर दोनों बिस्तर पर बैठ गईं। पुरानी यादें ताजा करती रहीं। टीना ने कहा-चलो तुम्हें लंदन से आए मेहमानों से मिलवाती हूँ। तुम्हें अच्छा लगेगा। हाँ, चलो। सुरभि-टीना उछलती-कूदती पहुँच गईं। वहाँ टीना ने कहा-ये है मेरी सबसे अच्छी दोस्त सुरभि और सुरभि ये रहे भगनानी अंकल, आंटी और मनीष। लंदन में ये लोग न मिलते तो न जाने क्या होता मेरा? सुरभि ने फटाफट भगनानी और मिसेज भगनानी के पैर छुए। सुरभि का यह कदम भगनानी दंपत्ति के मन को छू गया।
अरोरा दंपत्ति तैयारियों में उलझ गए और भगनानी दंपत्ति अपने कमरे में चले गए। मनीष, टीना और सुरभि फिर एक साथ बैठ गए। गप्प का सिलसिला शुरू हुआ तो दो घण्टे तक चलता रहा। दादी जी के टोकने पर ये तीनों उठे। यात्रा की थकान और टाइम साइकल को भगनानी दंपत्ति एडजस्ट कर रहे थे। सुबह सब लॉन में एकत्र हुए। दीपावली के बाद के प्लान पर चर्चा हुई। अरोरा ने अयोध्या, मथुरा, काशी, आगरा यात्रा का प्रस्ताव रखा तो सबको पसन्द आ गया। तय हुआ कि भाई दूज के बाद इन यात्राओं को अमल में लाया जाएगा। सब सहमत हो गए। अरोरा-भगनानी ब्रेकफास्ट के बाद फैक्ट्री चले गए। बाकी लोग घर में तैयारी में जुट गए।
शाम को पूजा आदि के बाद फिर सब एक साथ बैठे और ताश के पत्ते खेले गए। पटाख़ों से इस घर ने तीन साल पहले ही दूरी बना ली थी, जब टीना के साथ हादसा हुआ था। देर रात तक ताश का क्रम चला, जिसमें अरोरा और भगनानी दंपत्ति ने हिस्सा लिया। मनीष, सुरभि, टीना बीच-बीच में आते जाते रहे। चाय-कॉफी की जिम्मेदारी इन्हीं तीनों ने संभाल रखी थी।
रात में हलचल देख दादी की नींद खुल गई। वे टहलती हुई पहुँचीं वहाँ, जहाँ ताश खेलने का क्रम चल रहा था। तनिक देर तो बैठी रहीं फिर अरोरा का ध्यान गया। वे बोले-अरे माँ, आप इतनी रात यहाँ। सो जाइए। आपकी तबीयत खराब हो जाएगी। हाँ-हाँ, तुम सब रात रात भर जागकर तो स्वस्थ रहोगे। चलो, खाना खाओ और सो जाओ। कल दिन में यही काम करना। सब चुपचाप उठे और खाने के बाद अपने अपने कमरे में सोने चले गए।
अगली सुबह स्नान-ध्यान के बाद शहर के दार्शनिक स्थलों के सैर का फ़ैसला हुआ। सबसे पहले यह परिवार गंगा किनारे बिठूर पहुँचा। वहाँ सीता मैया के मंदिर समेत गंगा किनारे ये लोग बैठे। टीना, मनीष, सुरभि ने तो नौकायन भी किया। भगनानी ने कहा-गंगा जैसी नदी की रक्षा हम नहीं कर पा रहे हैं। दुर्भाग्यपूर्ण है। क्या कर रही हैं हमारी सरकारें? इन्हें तो कुछ लंदन से सीखना चाहिए। अरोरा ने कहा-मन मत खराब करो मेरे भाई। यह इंडिया है।
चलो, आगे चलते हैं। वहाँ से साईं मंदिर और जेके टेम्पल देखने के बाद ये लोग वापस घर आ गए। सब थक चुके थे। इसलिए हल्का भोजन और आराम का फ़ैसला हुआ। लेकिन टीना, सुरभि मनीष फिर निकल गए। टीना ने मनीष को अपना स्कूल दिखाया। फैक्ट्री दिखाया। दोस्तों से मिलवाया। टीचर सलोनी से मिलने ये सब उनके घर पहुँचे। अचानक टीना को देखकर सलोनी खुश हो गईं। देर तक ये लोग सलोनी मैडम के यहाँ ही गप्प मारते रहे। शाम को अरोरा ने फोन किया तो तीनों घर वापस आए।

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