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उम्मीद
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उम्मीद 48 : टीना-मनीष के पापा साथ बिजनेस करने को हुए राजी

टीना के फादर मिस्टर अरोरा और मनीष के पापा मिस्टर भगनानी लन्दन में बिजनेस शुरू करने के आइडिया पर दफ्तर में बैठकर बात कर रहे हैं। भगनानी चाहते हैं कि अरोरा हर हाल में बिजनेस शुरू करें लेकिन अरोरा इसके लिए तैयार नहीं है। उन्होंने बीते एक साल में घर में आई परेशानियों की चर्चा की और उसके हवाले से वित्तीय स्थितियों की भी। सब सुनने के बाद भगनानी ने उनसे पूछा कुछ फंड स्पेयर कर सकते हो तो मेरे प्रोजेक्ट में लगा दो। चलता हुआ काम है।
अपने इंडिया के अलावा, बांग्लादेश, श्रीलंका, म्यांमार, भूटान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान जैसे देशों का काम तुम सीधे देखते रहना और इसी बहाने में हम दोनों की मुलाकातें भी होती रहेंगी। बच्चों को भी धीरे धीरे इसी बिजनेस में डाल देंगे। दोनों काम करते करते सहज हो जाएंगे। फिर शादी करने का आनंद दो गुना हो जाएगा। तुम सोचो जरूर एक बार। अगर यह भी न हो पाए तो भी बताना, कुछ और सोचेंगे। मुझे तो तुम्हारे साथ बिजनेस करना ही है। कोई बहाना नहीं चलेगा। अरोरा ने आश्वस्त किया कि वे कुछ न कुछ करेंगे जरूर लेकिन थोड़ा वक्त चाहिए। इस बार लौटकर आंकलन करते हैं फिर बताते हैं।
भगनानी ने कहा-तुम्हारे मन में चल क्या रहा है? असल में मुझे अपनी माटी से बहुत प्यार है। मैं उससे एक दिन भी दूर नहीं रहना चाहता। फिर मम्मी तो गाँव भी बड़ी मुश्किल से छोड़ती हैं। वो तो टीना के मोहब्बत में वे मेरे पास रुकती हैं अन्यथा शहर आने को राजी ही नहीं होतीं। लन्दन भी वे आई हैं तो केवल और केवल टीना के लिए अन्यथा वे न आतीं। देश के बाहर मुझे बिल्कुल आनंद नहीं आता। मैं यह सोचकर ही परेशान हो रहा हूँ कि भला देश के बाहर भला मैं रह भी पाऊँगा? मुझे शक है। अपने सभी रिश्ते-नाते, बिजनेस पार्टनर, दोस्त, सबको छोड़ना पड़ेगा। यहाँ फिलहाल तुम्हारे अलावा और कोई तो है नहीं। अगर है तो मैं जानता नहीं। सोचो कितनी मुश्किलें आएंगी इस उम्र में।

तुम पर कोई फर्क इसलिए नहीं पड़ा क्योंकि बहुत पहले आ गए थे। कह सकते हो कि तुम्हारा पहला प्यार ही लंदन था और है भी। अपने केस में एकदम उलट है। मुझे तो केवल और केवल अपनी मातृभूमि से प्यार है। वही अपना पहला और अंतिम प्यार है। फिर भी तुम।निश्चिन्त रहो। मैं अपने दोस्त को निराश नहीं करूँगा। कुछ न कुछ करूँगा और तुम्हें जल्द से जल्द जानकारी भी दूँगा। ये हुई न बात-भगनानी ने कहा और अरोरा को गले लगा लिया।
घड़ी पर नजर पड़ी तो दोनों चौंक गए। शाम हो चली थी। बातचीत में दोनों ऐसे मशगूल हुए कि उन्हें लंच तक का ध्यान नहीं रहा और डिनर का टाइम हो गया। केवल चाय, कॉफी, स्नैक्स लेते रहे। दफ्तर से घर की ओर निकल दोनों टेम्स के किनारे रुके। भगनानी ने कहा-देखो इतनी सुंदर जगह तुम्हें कहीं मिलेगी क्या? अरोरा ने कहा-निश्चित ही यह स्थान खूबसूरत है। मेंटेन ही लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि भारत में कुछ है ही नहीं। पूरी दुनिया से पर्यटक भारत के चक्कर लगाता रहता है।
हमारे देश की खासियत यह है कि वहाँ सब कुछ है। ठंड, गर्म, बारिश, सब कुछ। वहाँ स्विट्जरलैंड जैसी खूबसूरत पहाड़ियाँ हैं तो अयोध्या, मथुरा, काशी जैसे ऐसे स्थल भी हैं जो पूरी दुनिया में कहीं नहीं हैं। हम भाग्यशाली हैं और हमें अपने प्रिय भारत पर गर्व है। मैं लन्दन की सराहना में पूरी रात कुछ भी सुन सकता हूँ लेकिन अपने भारत के खिलाफ एक शब्द नहीं। जहाँ हरे भरे पहाड़ भी हैं और कल कल करती नदियाँ भी। जहाँ स्वर्ग जैसा कश्मीर है तो केरल जैसे समुद्री इलाके भी हैं। सबसे बड़ी बात, तमाम दुश्वारियों के बीच हम अभी भी धर्मनिरपेक्ष हैं। देखो न कश्मीर में क्या हुआ, जितने बड़बोले नेता थे, सबकी जुबान बन्द हो गई।
जब हम उत्तर भारतीय राज्यों पर नजर दौड़ाते हैं तो केवल और केवल खूबसूरती नजर आती है। भगनानी ने टोका-अरे भाई अरोरा, मेरा भी देश वही है। मैं तुम्हारी राष्ट्रभक्ति पर कोई सवाल नहीं उठा रहा हूँ। जितना प्यार तुम करते हो भारत से, उससे तनिक कम प्यार मैं नहीं करता। अब दुनिया ग्लोबल विलेज में तब्दील हो चुकी है। जरा सोचकर देखो। बिजनेस करने के लिए पूरी दुनिया के दरवाजे खुले हैं। चलो घर चलते हैं। फिर दोनों चल पड़े। घर पहुंचकर भगनानी ने सभी को बधाई दी और खुलासा किया कि अब अरोरा और मैं मिलकर बिजनेस करेंगे। अरोरा इंडिया में रहकर और मैं लंदन में बैठकर बिजनेस को आगे बढ़ाएंगे। पहले मिठाई खिलाओ। फिर बढ़िया सी चाय। उसके बाद डिनर करेंगे क्योंकि लंच हम दोनों ने नहीं किया है। मिसेज भगनानी ने दौड़कर मिठाई ले आईं। यह सूचना दादी को भी दी गई। लेकिन वे कुछ खास बोलीं नहीं। न खुश हूं न ही नाराज। बस केवल इतना कहा-तुम सब जो करोगे अच्छा ही करोगे, ऐसा मुझे भरोसा है। बाकी प्रभु की इच्छा। हम तो तुम सबको खुश देखकर ही खुश हैं। मुझे इस उम्र में और क्या चाहिए।
सबने साथ बैठकर डिनर लिया और देर रात तक गप मारते रहे। इस दौरान मनीष-टीना भी खुश दिख रहे थे। दोनों के चेहरे की मुस्कान दोनों परिवारों की खुशियों में इज़ाफ़ा कर रही थी।

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