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उम्मीद
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उम्मीद 46 : क्या टीना के पापा लंदन में बिजनेस शुरू करेंगे?

सिनेमा हाल से निकलकर भगनानी-अरोरा परिवार रेस्तराँ गया| सबने भोजन किया| और फिर अलग-अलग गाड़ियों में बैठकर घर वापस आ गए| इस दौरान जो एक बदलाव सबने नोटिस की वह यह कि आते समय टीना-मनीष एक ही गाड़ी में थे लेकिन लौटते समय दोनों ने दो गाड़ियाँ इस्तेमाल की| रेस्तराँ में भी दोनों अलग-अलग बैठे | सबकी हंसी-ठिठोली के केंद्र इन दोनों की चुप्पी अरोरा-भगनानी परिवार को खटक रही थी|

घर पहुंचकर इस मसले पर पूछताछ हुई तो थकान का बहाना बनाकर दोनों अपने-अपने कमरों में चले गए| लेकिन भगनानी, अरोरा, दोनों की पत्नियाँ, दादी आदि बैठकर गप्पे मारते रहे| इस बीच दादी ने प्रस्ताव रखा कि हम लोगों को मनीष-टीना के रिश्ते के बारे में सोचना चाहिए| जैसे ही टीना की पढ़ाई पूरी हो जाए, इन दोनों की शादी करा देनी चाहिए| बहुत बढ़िया जोड़ी बनेगी| सबने एक बार हामी भरी लेकिन अगले ही क्षण मिस्टर अरोरा ने कहा-माँ, टीना अभी बहुत छोटी है| ग्रेजुएशन भी नहीं हुआ है लाडो का| रिश्ता बेशक अच्छा है लेकिन अभी वक्त है| यह बात हमारे मन में तो हो सकती है लेकिन इसे दोनों के बीच अभी ले जाने का वक्त नहीं आया है|

मनीष भी तो अभी ग्रेजुएट हुआ ही है| दोनों को अभी पढ़ने देते हैं| हाँ, सैधांतिक रूप से मैं सहमत हूँ| सबने ताली बजाकर ख़ुशी का इजहार किया और मिसेज भगनानी ने कहा-इस बात पर मिठाई तो बनती है| वह दौड़कर मिठाई लेकर आईं और सबने मिठाई खाकर एक बार जोरदार ठहाका लगाया| फिर होने वाले समधी-समधन गले मिले और चारों ने एक साथ दादी माँ के पैर छुए| तय हुआ कि इस बातचीत को यहीं ख़त्म करेंगे| कोई बच्चों से इस मसले पर चर्चा नहीं करेगा| न जाने क्या असर पड़ेगा| दोनों ही अभी पढ़ाई कर रहे हैं| हम समय आने पर इसका खुलासा करेंगे| सब सहमत हुए और शुभ-रात्रि बोलकर अपने-अपने कमरे में चले गए|

कमरे में पहुँचकर दादी ने देखा कि टीना करवटें बदल रही है| उसे नींद नहीं आ रही है| दादी ने पूछा-जब मेरी लाडो थकी हुई थी तो नींद क्यों नहीं आ रही है? नीचे से तो ऐसे भागी, जैसे बिस्तर नहीं मिला तो गिर पड़ेगी| क्या बात है? जरा मुझे भी तो पता चले| तुम्हारा मनीष से झगड़ा हुआ है क्या? तुम दोनों घर से निकले थे तो चेहरे पर रौशनी थी लौटे तो अँधेरा| आखिर क्यों? नहीं दादी, कुछ नहीं हुआ है| आपको कुछ गलतफहमी हुई होगी| ज्यादा थकान लगने पर भी तो नींद नहीं आती| मैं तो आपका इन्तजार कर रही थी| दादी ने जहाँ सिर में हाथ फेरा, नींद आ ही जाएगी| यह कहकर टीना दादी से लिपट गई| उधर, अरोरा और भगनानी दम्पति अपने कमरों में टीना-मनीष के रिश्तों की चर्चा करने लगे| दोनों ने माना कि यह एक बोझ कम हुआ|

वरना रिश्ते सोच-सोच कर भी बहुत समय लग जाता है| फिर भी कोई भरोसा नहीं कि उचित लड़का या लड़की मिल जाए| अच्छा हुआ दोस्ती को हम सब रिश्तेदारी में बदलने को तैयार हो गए हैं| मिसेज भगनानी ने कहा-एक काम करत हैं, टीना को हास्टल से घर बुलवा लेते हैं| यहीं से कॉलेज आएगी-जाएगी| दोनों धीरे-धीरे एक दूसरे को समझेंगे भी, क्या कहते हैं आप? मिस्टर भगनानी ने कहा-आइडिया बुरा नहीं है लेकिन अभी कोई जोखिम नहीं लेते हैं| हाँ, केयर बढ़ा दो| संडे मनीष को भेजकर उसे बुलवा लिया करो| त्योहार और अन्य छुट्टियों में भी उसे हास्टल से बुलवा लिया करो| उसका मन भी लगेगा और हम सब एक-दूसरे के बारे में समझेंगे भी| लेकिन, इस पूरे मामले में अतिरिक्त उत्साह नहीं दिखना चाहिए| हमारे लिए टीना का सहज रहना जरुरी है| ठीक कह रहे हैं आप-मिसेज भगनानी ने कहा| फिर दोनों सो गए|

सुबह सब फिर जल्दी उठ गए| लॉन में मजमा लगा| चाय की चुस्कियों का दौर चला| हंसी-ठिठोली भी जारी रही| मनीष-टीना भी आ गये लेकिन बैठे दूर-दूर| मनीष ने कहा-पापा, कोई ऐसा तरीका निकालिए कि अंकल का भी लंदन से रिश्ता बन जाए| घर में इतनी ख़ुशी मैं तो पहली बार देख रहा हूँ| चाहे अपने बिजनेस में ही पार्टनर बना लीजिए या फिर कुछ नया काम आप दोनों मिलाकर शुरू कर दीजिए| इसी बहाने यह खुशियाँ बरक़रार रहेंगी| आप दोनों की दोस्ती का रंग और चटख हो जाएगा| आइडिया बुरा नहीं है मनीष| भगनानी ने कहा| तुमने तो एक लाख डॉलर का नुस्खा दिया है| क्यों अरोरा, क्या सोचते हो तुम? अरे नहीं भाई! अभी वक्त नहीं आया है| मेरे सामने फंड का भी इशू है| फैक्ट्री में आग लगने और फिर उसके बाद आई दिक्कतों के बाद काफी वित्तीय संकट आ गया है|इसे मैनेज करने में वक्त लगेगा|

हाँ तो मैं कौन सा आज ही कह रहा हूँ| भगनानी ने कहा| आज चलो दफ्तर| इस पर वहीँ बैठकर चर्चा करेंगे और कोई रास्ता सोचेंगे| मनीष की आँखों की चमक मैं नहीं कम होने देना चाहते| क्या सोचते हो? चलो भाई, तैयार हो सब फटाफट| अपने-अपने काम पर निकलो| मनीष, तुम टीना को डॉक्टर के पास लेकर चले जाना| ठीक है पापा| और सब तैयार होने चले गए|

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