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उम्मीद 45 : सिनेमा देखने गए टीना-मनीष की आपसे में हुई कुट्टी

लंदन में मौजूद अरोरा परिवार के सदस्य सोकर उठ चुके थे| सब लॉन में एकत्र थे तभी भगनानी आए| सभी ने एक-दूसरे को गुड मॉर्निंग बोला| चाय आई सभी ने पी लेकिन टीना के बिना कुछ सूना-सूना लग रहा था| भगनानी ने आवाज लगाईं-मनीष, टीना को जगाना तो| दादी ने कहा-थोड़ी देर उसे और सोने देते हैं, क्योंकि वह रात में बात करती रही| इस चक्कर में देर से सोई है| यह सुनने के बाद भगनानी मनीष को आवाज देते कि वह टीना को जगा चुका था| आँख मीचते हुए टीना लॉन की ओर आई और भगनानी अंकल समेत सबको गुड मॉर्निंग बोलकर दादी के पैरों के पास बैठ गई|

भगनानी ने टीना का हाल पूछा| उसने कहा-बहुत बढ़िया अंकल| मेरी दादी यहाँ जो आ गई है| इनसे बड़ा डॉक्टर मेरे लिए कोई हो ही नहीं सकता| यह कहते हुए टीना दादी को निहारने लगी| लॉन में बैठे-बैठे ही आज का प्रोग्राम तय हुआ| लंदन भ्रमण के अलावा सिनेमा देखने और बाहर डिनर पर सभी ने सहमति जताई| एक और राउंड चाय पीने के बाद सब तैयार होने चले गए| ब्रेकफास्ट के बाद भगनानी और मिस्टर अरोरा दफ्तर चले गए| मिसेज भगनानी, मिसेज अरोरा, दादी, टीना और मनीष को एक साथ दोपहर में निकलना था| पूरा प्लान मनीष को समझकर भगनानी निकल गए| नाश्ते के बाद सब लिविंग रूम में बैठे गप मारने लगे| मनीष की नजर टीना पर लगी रही और वह दादी से ही चिपकी रही| इस पर मनीष को गुस्सा भी आ रहा था लेकिन बेचारा विवश था|

माँ, आंटी, दादी के सामने कुछ कह भी नहीं पा रहा था| इस बीच दादी दवाई के लिए अपने कमरे में गईं और माँ, आंटी टीवी देखने में व्यस्त हुईं तो मनीष ने टीना से बातें शुरू कर दी| देखते-देखते दो घंटे से ज्यादा गुजर गए| सब तैयार हो गए लेकिन टीना-मनीष लिविंग रूम में ही बैठे गप्प मारते रहे| माँ की फटकार सुनने के बाद मनीष उठा और तैयार होने चला गया| टीना भी दादी के कमरे में चली गई लेकिन जाने से पहले आंटी से उसने माफ़ी माँगी| उसने कहा कि उसकी वजह से ही बातचीत लम्बी खिंच गई और बेचारा मनीष आपके गुस्से का शिकार हो गया| मिसेज भगनानी ने कहा-तुम जाओ तैयार हो जाओ| ये मनीष नाम का प्राणी है ही ऐसा| उसकी बातें खत्म कराने के लिए मुझे अक्सर ऐसा करना होता है| तुमसे तो कुछ ज्यादा ही हिल-मिल गया है|

मिसेज भगनानी से टीना के माफ़ी माँगने से मनीष मन ही मन प्रसन्न हो गया| उसका भरोसा इस बात में बढ़ने लगा है कि टीना उससे प्यार करती है| अगर ऐसा न होता तो मम्मी ने मुझे फटकार लगाईं तो भला उसने माफ़ी क्यों माँगी? पूरे अनुशासन में रहकर उसने टीना से प्यार की पींगे बढ़ाने का फैसला किया| वह किसी भी रूप में टीना को पाना चाहता है| सब तैयार होकर घर से निकले| शहर भ्रमण के बाद सिनेमा देखने के लिए सब पहुँचे| वहीँ मिस्टर अरोरा और मिस्टर भगनानी भी आ गए| मनीष और टीना एक साथ बैठे| सिनेमा शुरू हुआ और जैसे ही हीरो का आगमन परदे पर हुआ तो मनीष ने खुद को उससे जोड़ लिया और टीना को हीरोइन मानकर सपने बुनने लगा| सीन आगे बढ़ता गया और मनीष डूबता गया| अब उसका ध्यान बगल में बैठी टीना पर भी नहीं था| ऐसा लगा कि वह सपनों में खो गया हो| जब टीना को इस बात का एहसास हुआ तो उसने मनीष को चिकोटी काटी|

वह चौंका और धीरे से बोला-क्या कर रही हो शैतान लड़की? सिनेमा में कोई चिकोटी काटता है क्या? टीना ने कहा-मैं क्या करूँ? मुझे लगा कि तुम कहीं गुम हो गए हो तो जगाने के इरादे से चिकोटी काटने के अलावा मेरे पास विकल्प भी तो नहीं था| यार सोचो-मैं तुम्हारे बगल में हूँ और तुम अजनवियों जैसा व्यवहार कर रहे हो, यह सामान्य बात तो नहीं है| जो लड़का टीना के साथ समय गुजारने के बहाने तलाशता हो और टीना उसके बगल में बैठी हो फिर भी वो कहीं खो जाए तो स्वाभाविक है चिंता होती है| ऐसी हरकतें प्रायः एकतरफा प्यार में पागल प्रेमी करते हैं| क्या तुम किसी प्रेमिका की याद में खो गए थे? आखिर कौन है वो? बताओ जरा, मुझे भी तो पता चले|

मनीष मना करता रहा लेकिन टीना ने उससे सवाल पूछना बंद नहीं किया| आजिज आकर उसने कहा कि एक लड़की से उसे प्यार है| वह ब्रिटेन से है और सिनेमा देखते हुए उसने खुद को परदे पर देखना शुरू कर दिया था| इसीलिए खो सा गया था| टीना बोली-मुझे मिलवाओ| जरा देखते हैं कौन है वो परी, जिसकी याद में मनीष इतना खो गया कि उसे बगल में बैठी टीना की परवाह भी नहीं रही|

यह सुनने के बाद मनीष का भरोसा बढ़ने लगा कि टीना भी मन ही मन उसे प्यार करती है| तभी तो वह एक काल्पनिक प्रेमिका की चर्चा सुनने मात्र से चिढ़ सी गई है| मनीष ने सॉरी बोला तो टीना तुनक कर नाराज हो गई और बोली-जाओ अपनी उसी लैला के साथ बैठो| बातें करो| कल तक तो टीना के साथ बैठना, उससे बातें करना, समय गुजारना तुम्हें अच्छा लगता था और आज जब पहली दफा टीना तुम्हारे पास पूरे सवा दो घंटे के लिए मौजूद है तो तुम उस दौरान अपनी प्रेमिका के फेर में बेहोश हो चले हो…यह ठीक नहीं है| अबसे मेरी-तुम्हारी कुट्टी| जाओ|