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उम्मीद 43 : खेल के मैदान पर टीना की हड्डी टूटी, परिवार घबराया

कॉलेज में खेलते हुए टीना गिरी और उसके हाथ में फ्रैक्चर हो गया| कॉलेज प्रशासन लेकर अस्पताल भागा| शुरूआती इलाज के बाद टीना ने घर पर खबर कर दी| सब घबरा गए| टीना के पापा मिस्टर अरोरा ने कॉलेज से कहा कि अगर अनुमति मिल जाए तो बिटिया को फिट होने तक के लिए इंडिया वापस बुला लें लेकिन बात नहीं बनी| कॉलेज प्रशासन का तर्क था कि उसके एक हाथ की हड्डी टूटी है| इलाज हो रहा है| यहाँ रहेगी तो उसकी क्लासेज का नुकसान नहीं होगा|

मिस्टर अरोरा ने तय किया कि टीना की मम्मी या दादी में से कोई एक या फिर दोनों चले जाएँ| चंद समय विचार-विमर्श के बाद तय हुआ कि दोनों सास-बहू लंदन जाएँगी| लेकिन दादी का तो पासपोर्ट ही नहीं है| अरोरा साहब ने पासपोर्ट अप्लाई कर दिया लेकिन पत्नी को तत्काल रवाना कर दिया| वे लंदन पहुंचकर दोस्त के घर रुकीं| उनका घर कॉलेज का पास में ही है| फिर ये लोग हास्टल पहुँचे और टीना को लेकर आ गए| मम्मी को देख टीना बरबस भावुक हो उठी और लिपट गई| उसके आँखों में आँसू थे| माँ का भी रो-रोकर बुरा हाल था| यह सब देखते हुए टीना के दोस्त भी भावुक हो गए| टीना मम्मी के साथ भगवानी अंकल के घर पहुँची तो खुश दिख रही थी| हाथ में प्लास्टर बंधा होने के बावजूद वह उछल कूद करने लगी| असल में भगवानी का बेटा मनीष और टीना अच्छे दोस्त बन चुके थे| पिछली दफा जब टीना के पैर में मोच आई थी तब कॉलेज के अलावा यही नौजवान मदद के लिए उसके साथ खड़ा था| कुछ देर बाद टीना मम्मी की गोद में लेट कर मनीष के बारे में बात करने लगी| किस तरह से उसने केयर किया| क्या अपनापा हो गया है दोनों में| तब तक मनीष भी आ गया| बोली-मम्मी, ये मनीष मोच ठीक होने के बाद दिखा भी नहीं मेरे आसपास| इतना निर्लज्ज है| खाली फोन पर पकर-पकर करने में इसका कोई सानी नहीं है|

मनीष ने कहा-आंटी, आप ही बताओ| जब मेरी जरूरत थी तो मैं इसके पास था| फिर फोन पर हरदम उपलब्ध हूँ| आखिर इसे पढ़ने के लिए आपने भेजा है कि दोस्ती करने के लिए? मिसेज अरोरा ने मनीष का समर्थन किया और टीना के गाल पर थपकी दी| टीना ने कहा-मम्मी, जब पैर में मोच आई थी तब ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कई हड्डियाँ टूट गई हों| क्योंकि हम अपने घर में नहीं थे न| ऐसे में मनीष का साथ बहुत राहत दे रहा था| दोस्ती सी हो गई थी| मुझे लगा कि कम से कम छुट्टियों में तो मिलने आया ही करेगा लेकिन नहीं, जनाब के पास वक्त ही नहीं है| इतने ज्यादा मशगूल हैं पढ़ाई में| और हों भी क्यों नहीं आखिर ब्रिटेन का अर्थशास्त्र तो यही चला रहे हैं न| इनके पास मुझ नाचीज के लिए समय कहाँ? मनीष ने कान पकड़ सॉरी बोला और कहा कि आगे से ऐसी गलती नहीं होगी| वह इस बात का ध्यान रखेगा| अब टीना मम्मी के साथ ही सोती, घूमती और दिन में कॉलेज जाती| टीना के न होने की वजह से उसके हास्टल के दोस्त भी मिस कर रहे थे लेकिन खुश थे क्योंकि उसकी मम्मी इंडिया से लन्दन आई हुई हैं|

उधर, पल-पल की खबर रखने वाले मिस्टर अरोरा भी यहाँ विचलित हुए जा रहे था| वे एक बार बिटिया को गले लगाने को आतुर थे| माँ के पासपोर्ट का इन्तजार ख़त्म होते ही वे खुद भी चल पड़े और टीना को इसकी जानकारी नहीं दी| एयरपोर्ट से उतरकर माँ-बेटे सीधे होटल पहुँच गए| फ्रेश होकर फिर पहुँचे दोस्त भगनानी के घर| बिना सूचना अचानक देखकर भगनानी परिवार चौंक गया| मिसेज अरोरा केवल मुस्कुराती रहीं| टीना उस समय कॉलेज गई हुई थी| कुछ देर बाद ये सब एक साथ उसे लेने के लिए निकले| मिस्टर अरोरा ने भगनानी परिवार को बता दिया था कि हम सब कॉलेज से होटल जाएँगे| इस पर भगनानी नाराज हो गए और बोले-पहले टीना को लेकर यहाँ आओ| खाओ-पीओ| सब मिलकर गप्प मारेंगे फिर तय करेंगे कि तुम होटल आओगे या होटल से तुम्हारा सामान यहाँ आएगा| मिस्टर अरोरा हाँ में हाँ मिलाते हुए कॉलेज रवाना हो गए| वहाँ दादी को देखते ही टीना की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा| उसने कहा-पापा कोई तरीका निकालो और दादी को यहीं छोड़ दो| इनकी झप्पी ही मेरे लिए पर्याप्त है| उसने शिकायत भी की कि आपने अपने और दादी के आने की जानकारी क्यों नहीं दी? दैट्स सरप्राइज बच्चे| आखिर मैं तुम्हारा बाप हूँ|

तुम्हें कैसे ऐसा लगा कि मेरी बिटिया को चोट लगी और मैं इंडिया में बैठकर शोक मनाऊंगा| नहीं, हम मस्ती करने आ गए| हमें पता है कि तुम्ह अब जल्दी से ठीक हो जाओगी| सब गाड़ी में बैठे और भगनानी के घर पहुँच गए| और फिर वहां शुरू हुई मस्ती की पाठशाला| कब आधीरात हो गई किसी को पता नहीं चला| मिस्टर अरोरा होटल भूल चुके थे| जब याद आया तो होटल फोन करके जानकारी दी और मनीष, टीना जाकर सामान ले आए| गेस्ट रूम में सब रुके और एक सप्ताह तक धमाचौकड़ी का कार्यक्रम तैयार हुआ|

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