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उम्मीद 42 : समय की पाबंद टीना को मिला कॉलेज में पुरस्कार, सब खुश

टीना की क्लास में अक्सर छात्र समय से नहीं आते| इस बात से टीचर भी परेशान थे और कई बार टीना को भी असहज होना पड़ता| क्योंकि क्लास में अकेली ऐसी स्टूडेंट है, जो समय की पक्की है| आजतक कभी लेट नहीं हुई| कभी क्लास बंक नहीं किया| लंदन आने के बाद तो वह इस मसले पर और गंभीर है| समय पर क्लास में आने की वजह से उसे कई बार पुरस्कार भी मिल चुके हैं| उसने यह फार्मूला अपने लंदन वाले टीचर को भी दिया| वे सहमत हुए और उसी दिन घोषणा कर दी कि समय पर आने वाले सभी छात्रों को पुरस्कृत तो किया ही जाएगा, छात्र की परफार्मेंस के आधार पर इसका सकारात्मक और नकारात्मक असर परीक्षा परिणाम पर भी पड़ेगा|
इस घोषणा को लेकर क्लास से लेकर हास्टल तक में तरह-तरह की चर्चाएँ शुरू हो गईं लेकिन टीना और गंभीर हो गई| वह रोज समय का ध्यान रखने लगी| सारे साथी उससे इर्ष्या करते| एक दिन कुछ साथियों ने टीना को घेर लिया और पूछा कि समय की इतनी पाबंद वह कैसे है? टीना मुस्कुराई और एक किस्सा बयाँ किया, जो उसे उसके पापा ने सुनाया था| बोली-मेरे पापा कॉलेज से निकले ही थे| पढ़ने में मेधावी थे| उनका सेलेक्शन सिविल सर्विसेज में हो गया था| इंटरव्यू के लिए दिल्ली जाना था| तब साधन उतने थे नहीं और पैसे भी बहुत नहीं होते थे| ट्रेन देर से चलने की सूचना मिली तो वे घर से ही फोन पर ट्रेन का समय पता करने लगे| जब स्टेशन पहुंचे तो पता चला कि वे दो मिनट लेट हो गए और यह लेट इसलिए हुआ क्योंकि रास्ते में बिजली को लेकर लोग धरना दे रहे थे| इस वजह से सड़क जाम थी|
नतीजा यह हुआ कि तमाम कोशिशों के बावजूद वे समय से इंटरव्यू के लिए नहीं पहुँच सके| अगर पापा स्टेशन चले गए होते तो अधिकतम क्या होता? कुछ घंटे इंतजार करना पड़ता लेकिन ट्रेन मिल जाती| उस घटना की चर्चा पापा हर किसी से करते हैं, मुझसे भी बहुत बार कर चुके हैं| अब तो कभी वे इस कहानी को किसी भि सन्दर्भ में कहने की कोशिश भी करते हैं तो हम लोग उसे पूरा करने का प्रयास करते हैं और घर में ठहाका लग जाता है| जब से यह किस्सा सुना है तब से आज तक दिन प्रतिदिन मैं समय को लेकर गंभीर हूँ| वो कहते हैं न कि वक्त, मौत और ग्राहक किसी का इंतजार नहीं करते| और मेरे लिए तो यह समय बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि मैं इसी की वजह से अपने स्कूल में सेलिब्रेटी थी और आज तुम सब भी इसी वजह से ही तो मुझे घेरकर बैठे हो|
इस कहानी को सुनने के बाद ज्यादातर छात्र गंभीर मुद्रा में चले गए| तय किया कि कल से क्लास में एक मिनट भी देर नहीं होने पाएगी| टीना ने कहा-दैट्स ग्रेट| अब हम लोग कल मिलते हैं क्लास में और देखना जरूरी है कि कौन-कौन समय का ध्यान रखता है और कौन-कौन फिर से लेट होता है| और अगले दिन कुछ तो समय से आए लेकिन ज्यादातर के पास बहाने थे| टीचर ने एक महीने की अटेंडेंस को आधार बनाकर टीना को पुरस्कृत किया| और आज लेट आने वालों से कारण पूछा| एक नौजवान ने कहा-आज मंगलवार है| मैं मंदिर चला गया था| दूसरे ने कहा-मम्मी की तबीयत ठीक नहीं चल रही इन दिनों, इसलिए मैं सो नहीं पा रहा हूँ| जब देर से सो रहा हूँ तो आँख ही देर से खुली| एक ने कहा कि मैं अपने एक रिश्तेदार के घर चला गया था, वहीँ देर हो गई| एक ने कहा-मुझे रात में बहुत तेज बुखार था| इसी तरह दर्जन भर लेट आने वालों ने भांति-भांति के बहाने बनाए| झूठ बोलने वालों को भी पता था कि वे गलत हैं और क्लास टीचर को भी पता था कि ये सिर्फ बहाने बना रहे हैं|
टीचर ने उस दिन पूरी पूरी क्लास समय के महत्व पर की| दुनिया भर के दृष्टान्त उठाकर उन्होंने छात्रों को सुनाए| यह भि कहा कि टीना इस मामले में आदर्श स्थापित कर चुकी है| आप सब उससे सीख सकते हैं| उन्होंने दीवाली पर टीना के पटाखे से जलने, उसके पापा की फैक्ट्री में आग लगने आदि की घटनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि किस तरह बिस्तर में पड़े पड़े इस लड़की ने अपनी इंटर की परीक्षा की तैयारी की और आज हम सबके बीच में अव्वल है| किस तरह इसने फैक्ट्री में आग लगने के बाद परिवार पर आई विपदा को संम्भाला, वह काबिल-ए-तारीफ़ है| और टीना यह सब इसलिए कर पाई, क्योंकि उसे पता है कि जो भी समय बीत रहा है, यह उसके जीवन में दोबारा नहीं आएगा| इसलिए वह अपना बेस्ट नित्य प्रति, हर पल देती है| यही उसकी कामयाबी का राज है| यही उसके सेहतमंद रहने का राज है| यही उसके खुश रहने का राज है| यही उसे हरदम कुछ नया करने की प्रेरणा देता है| यह सब सुनते हुए टीना मन ही मन बहुत प्रसन्न थी| लंदन में उसे पहली बार पुरस्कार मिला| पहली दफा टीचर ने उसकी सराहना में खुलेमन से कुछ शब्द कहे| टीना हास्टल पहुंची और पापा से अपनी खुशियाँ साझा की| टीना की कामयाबी पर दादी, मम्मी, दोस्त सुरभि, सब बहुत खुश हुए| सभी ने उसे बधाई दी| टीना ने सभी का शुक्रिया अदा किया और बोली-इससे हमने प्रेरणा मिलती है और अच्छा करने की| मैं आप सभी को निराश नहीं करूंगी| जय हिन्द|

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