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उम्मीद
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उम्मीद 41 : टेंशन में है छेड़खानी करने वाले युवक को पीटने वाली सुरभि

सुरभि को छेड़ने वाले युवक की पिटाई और फिर गिरफ्तारी की खबर अगली सुबह अखबारों में छपी। यह सब देख वह टेंशन में आ गई। अरोरा साहब भी थोड़ा चिंतित हुए लेकिन उन्होंने इस भाव को चेहरे पर नहीं आने दिया। बस उन्होंने यह जरूर कहा कि अबसे सुरभि अपना ज्यादा खयाल रखेगी और स्कूटी से कोचिंग या कॉलेज नहीं जाएगी। उन्होंने गाड़ी का प्रबंध कर दिया।
लेकिन सुरभि को अब यह पूरा प्रकरण सताए जा रहा था। अनहोनी की आशंका भी उसे बार बार घेरे हुए थी। सुरभि की माँ अलग तनाव में थी। अब तो वह खुद जब भी समय मिलता, बेटी के साथ जाने लगीं। इस मसले पर सुरभि ने टीना से बातचीत करने का फैसला किया। उसने टीना को कॉल किया। बातचीत शुरू हुई। केंद्र में था पिटा हुआ नौजवान। सुरभि ने कहा-यार मुझे लगता है कि पब्लिक ने उसे कुछ ज्यादा ही पीट दिया। ऊपर से पुलिस भी पकड़ ले गई। अब बेचारा जेल की रोटियाँ तोड़ रहा है। मेरी वजह से उसकी बेइंतहां पिटाई हो गई। अरे अरे झाँसी की रानी, उसने तुम्हें तंग किया। खुलेआम सड़क पर सताया। वो नहीं दिख रहा। कहीं तुम उसके बारे में कुछ खास तो नहीं सोचने लगी-टीना ने पूछा। नहीं-नहीं, रे बाबा। मेरे मन में कोई भाव नहीं है, अलावा इसके की उसे जो भी दर्द मिला उसकी गुनहगार मैं हूँ। न सड़क पर उसे पीटती, न पब्लिक कुछ जान पाती। न ही उसे जेल जाना पड़ता। पूरे शहर में बदनाम हुआ सो अलग। टीना ने कहा-बहन तुम कुछ भी कहो। यह सारी बातें इशारा कर रही हैं कि तुम्हें उससे प्यार हो गया है। लेकिन ध्यान रखना अपना, जरूरी नहीं है कि उसे भी प्यार हो गया हो तुमसे। अब वह तुमसे बदले की भावना भी रख सकता है लेकिन डरने की बात नहीं है। ध्यान रखने की बात कही है मैंने। मैं पापा से भी बात करूँगी। टीना ने पापा से चर्चा की और एक बार फिर से उसके घर जाने के लिए मना लिया।
अरोरा साहब गए नौजवान के घर। वहाँ मातम पसरा हुआ था। बेटा अस्पताल में था। पुलिस साथ में थी। मोहल्ले में लोग तरह तरह की बातें कर रहे थे। किसी परिवार के लिए यह बहुत खराब क्षण होता है। अरोरा साहब ने पूरे परिवार के दुःख पर मरहम लगाया। वे उस नौजवान से मिलने अस्पताल भी गए। वे कुछ बोलते इससे पहले वह बिस्तर में पड़े पड़े हाथ जोड़कर कातर नजरों से उन्हें देखकर बोला-अंकल मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई है। मुझे माफ़ कर दीजिए। मेरी अक्ल मारी गई थी। मैं इसका प्रायश्चित करना चाहता हूँ। कैसे करूँ? मैं समझ नहीं पा रहा हूँ। अरोरा साहब ने कहा कि अभी तुम अपनी सेहत का ख्याल रखो। अस्पताल से मुक्त होकर घर पहुँचों। थाना, पुलिस, कचहरी से निपटने के बाद यह भाव में में ले आना। उसने कहा-अंकल, मुझे सुरभि से माफी मांगनी है। क्या मैं उससे एक बार मिल सकता हूँ? अरोरा साहब ने कहा-अभी इसका समय नहीं आया है। तुम वही करो, जैसा मैंने कहा है। इधर-उधर ध्यान देने की जरूरत नहीं है।
अरोरा साहब घर आ गए। उन्होंने परिवार में चर्चा की। उस नौजवान की बात भी उन्होंने सुरभि की माँ से कही। माँ के हवाले से यह बात सुरभि तक पहुँची। वह और असमंजस में पड़ गई। घटना के चार दिन बाद भी वह कोचिंग नहीं गई। कॉलेज नहीं गई। कभी अनहोनी की आशंका उसे सताती तो कभी उस नौजवान का चेहरा उसके सामने आ जाता। इसी उहापोह में उसका मन कहीं नहीं लग रहा था। वह एक बार उसे देख लेना चाहती थी। उधर, नौजवान ने अस्पताल के बिस्तर पर पड़े पड़े तय किया कि इस बार वह सीधे अरोरा साहब से बात करके सुरभि से ही राखी बंधवाने का अनुरोध करेगा। अगर अनुमति मिल गई तो वह सुरभि से एक नए रिश्ते की शुरुआत करेगा।
सुरभि बिना किसी को बताए अस्पताल पहुंच गई। वह सीधे वार्ड में पहुँची। मुँह पर दुपट्टा लपेटे हुए थी। वह उसके सिरहाने वाले मरीज को देखने का यत्न कर रही थी, जो तीमारदारों से घिरा हुआ था। सिस्टर उसकी पट्टी कर रही थी। यह नौजवान भी अपने मम्मी-पापा से सुरभि से राखी बंधवाने के बारे में बात कर रहा था। उसने कहा कि इस संदर्भ में पापा अरोरा साहब से बात कर लें। मुझसे बहुत बड़ी गलती हो चुकी है। अब प्रायश्चित ही इसका एक मात्र चारा है और मैं यह करना चाहता हूँ।
उसके मम्मी-पापा को यह बात ठीक लगी। उन्होंने वायदा किया कि वे अरोरा साहब से इस आशय की विनती करेंगे। यह सब सुनने के बाद सुरभि वहाँ से निकल पड़ी और वापस घर आ गई। उसके मन में तरह तरह के सवाल उमड़ने लगे। वह खुश तो थी लेकिन इस बात से हैरान भी थी कि इतना पिटने के बाद भी उसके मन में यह भाव कैसे आ गए? उसकी मुश्किल यह थी कि इस बात की चर्चा भी वह किसी से नहीं कर सकती थी। लेकिन उसने टीना से इसकी चर्चा की। पहले तो टीना ने उसका मन हल्का करने के लिए कहा-झाँसी की रानी का दिल मोम की तरह हो गया। निश्चित ही उन्हें उस नौजवान से प्यार हो गया है लेकिन सुरभि ने बार बार मना किया। तब टीना ने कहा-जब तुम्हारे मन में कुछ नहीं है तो मस्त होकर पढ़ाई पर ध्यान दो। उसके मम्मी-पापा और अपने पापा पर भरोसा करो। राखी में अभी वक्त है। जब इस आशय का कोई प्रस्ताव आए तो मिलकर हम सब फैसला करेंगे। तब तक अपना ख्याल रखो। मन लगाकर पढ़ाई करो।

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