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उम्मीद
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उम्मीद 35 : आगे की पढ़ाई के लिए मम्मी-पापा के साथ टीना चली लंदन

टीना शाम को लंदन की उड़ान पकड़ने वाली है। मम्मी-पापा भी साथ जा रहे। उसके पहले पासपोर्ट, वीसा के अलावा बैगेज की तैयारी भी चल रही है। दादी ने गाँव से देशी घी, अचार मँगाया है। इसे हैंडबैगेज में रखा गया, जिससे सुरक्षित पहुँच जाए।
टीना स्टूडेंट है तो उसने बाकी चीजों के साथ जेमिट्री बॉक्स भी रख लिया अपने लैपटॉप बैग में। लखनऊ से दिल्ली और वहाँ से आगे की यात्रा करनी है। चूँकि अंतराष्ट्रीय उड़ान की रिपोर्टिंग तीन घंटे पहले होती है, इसलिए लखनऊ से दो बजे की उड़ान ली गई। सब एयरपोर्ट पहुँच गए। दादी, बुआ, सुरभि सब एयरपोर्ट तक आए और अपनी बिटिया को विदा किया।
एयरपोर्ट में एंट्री लेने के बाद बोर्डिंग पास लेकर सब सुरक्षा जाँच के लिए आगे बढ़े। तीनों हैंड बैगेज सुरक्षा कर्मियों ने रोक लिए। पूछताछ में पता चला कि दादी का घी और अचार हैंडबैगेज में नहीं जा सकता। उसे लगेज के माध्यम से भेजना होगा। टीना के लैपटॉप बैग में रखे जेमिट्री बॉक्स से कैंची समेत अन्य नुकीली चीजें भी सुरक्षा कर्मियों ने निकाल दिया। अब संकट यह था कि घी और अचार को कैसे बुक किया जाए। क्योंकि लगेज में इसके नुकसान होने की आशंका थी। खैर, टीना ने पापा से अनुरोध किया कि दादी का प्यार है। इसे हम लोग लगेज में दे देते हैं। पापा ने कहा बेटा टूट जाएगा। यहीं सुरक्षा कर्मियों को दे देते हैं। जैसे ही यह प्रस्ताव सुरक्षा दस्ते के कानों में पड़ा उन्होंने सामने रखे डस्टबिन की तरफ इशारा किया। कहा-इसे या तो लगेज में बुक करें या फिर कूड़ेदान में डाल दें। जहाज में तो यह कतई नहीं जाएगा। सुरक्षा दस्ते की बातचीत में थोड़ी सख्ती थी।
यह बात अरोरा परिवार को बुरी लगी लेकिन कानून के आगे सब विवश थे। वापस काउंटर पर गए और लगेज में बुक किया। फिर सुरक्षा जाँच के बाद तीनों बैठ गए। अभी बोर्डिंग में समय था। टीना खो गई यादों में। सुरभि, दादी, टीचर सलोनी, घर, स्कूल सब एक-एक कर उसकी यादों में आने लगे। मीठी-मीठी यादें, झगड़े-लड़ाई सब घुमड़ते हुए याद आए। वह बेचैन हो उठी। उसकी चुप्पी को अरोरा साहब ने महसूस कर लिया। उन्होंने बेटी को टोका और कहने लगे अपने लखनऊ के एयरपोर्ट भी अच्छा बना हुआ है। सारे इंतजामात भी ठीक लग रहे हैं। टीना चहककर बोली-पापा, अच्छा है लेकिन बहुत छोटा है। मुझे तो दिल्ली का एयरपोर्ट अच्छा लगता है। साइज में भी तो बहुत बड़ा है। वहाँ जहाज तो ऐसे खड़े दिख जाते हैं जैसे स्टैंड पर टैक्सियाँ। पापा ने हाँ कहा और इस तरह बातचीत का माहौल बन गया।
पिता-पुत्री की बातचीत के दौरान मिसेज अरोरा केवल टीना को निहारती रहीं। कभी उसके सिर पर हाथ रखतीं तो कभी उसका हाथ अपने हाथों में लेकर चूम लेतीं। टीना मम्मी के इस प्यार को महसूस कर रही थी। उसे यह भी पता चल रहा था कि मम्मी वापस आने के बाद की स्थिति पर विचार करके बार-बार भावुक हो रही है वह भी बिना कुछ बोले। बोर्डिंग का समय हो गया। सब आनन-फानन उठे और जहाज में पहुँच गए। टीना ने विंडो सीट ली। बीच की सीट पर माँ और आइल सीट पर मिस्टर अरोरा बैठे। थोड़ी देर में जहाज उड़ चला। तनिक देर शांति के बाद मिसेज अरोरा ने बेटी का हाथ पकड़ा और फिर से चूम लिया। इस बीच टीना आसमान निहारती रही। इस दौरान तीनों चुप ही रहे और विमान दिल्ली पहुँच गया।
मिस्टर अरोरा ने तय किया कि बोर्डिंग पास, इमिग्रेशन, सुरक्षा जाँच आदि के बाद चाय-काफी लेंगे। हुआ भी ऐसा। अब इस परिवार के पास बोर्डिंग में दो घण्टे का समय था। टीना को भूख लगी थी। उसने जैसे ही बोला, मम्मी ने तपाक से पूछा-मेरी लाडो क्या खाएगी। दादी के हाथों की पूरियां और आलू भुजिया या फिर यहीं से कुछ लाएँ। टीना अवाक थी। इतना तेज रिस्पॉन्स कभी भी माँ ने नहीं दिया था जो पिछले एक महीने से दे रही है। उसने कहा-जो आपकी मर्जी। माँ गई कॉफी शॉप। वहाँ से ढेर सारी सैंडविच, कोल्डड्रिंक लेकर आ गईं। मिसेज अरोरा बेटी के साथ हर वो पल जीना चाहती थीं, जो अब तक उन्होंने मिस किया था लेकिन समय तेजी से भाग रहा था। उन्हें पता था कि अब कुल एक सप्ताह की ही बात है। उसके बाद टीना को हम महसूस तो कर पाएँगे लेकिन भौतिक तौर पर वह मेहमान हो जाएगी। खाने के बाद मिसेज अरोरा ने एयरपोर्ट पर ही बेटी के साथ थोड़ी देर वाक करती रहीं। इस दौरान बचपन के किस्से भी उन्होंने साझा किए। टीना की शैतानियाँ, उसकी मसखरी सब पर मिसेज अरोरा बातें करती रहीं और इस बीच कभी वे मुस्कुरातीं तो कभी खिलखिलाकर हँसतीं और इसी बीच कई बार उनकी आँखें भी नम हुईं।
खैर, बोर्डिंग का समय हो गया। अरोरा परिवार ने भी अपनी-अपनी सीट ली। थोड़ी देर बाद जहाज उड़ चला और लगभग 10 घंटे बाद सूचना मिली कि जहाज अब लंदन में लैंड करने वाला है। एयरहोस्टेस ने लंदन के मौसम, समय आदि की जानकारी भी दी। विमान उतरा तो सब धीरे धीरे निकले और इमिग्रेशन क्लीयरेंस के बाद होटल रवाना हो गए। यहाँ बिटिया को कॉलेज दाखिला कराने के बाद अरोरा साहब वापस आने वाले हैं।