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Imran khan
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मेरी पाकिस्तान यात्रा और इमरान से मुलाकात

दिनेश पाठक

कश्मीर से अनुच्छेद 370 की रवानगी के बाद मन में आया कि पाकिस्तान हो आया जाए। सो, मैं चला गया। लाहौर, करांची घूमने के बाद अपने पाकिस्तानी दोस्त प्रधानमंत्री ज़नाब इमरान खान साहब से मुलाकात करने की दिली तमन्ना जागी। उनसे अपनी एक बार की मुलाकात थी| वे पहले विदेशी क्रिकेटर रहे, जिनसे पत्रकारिता में आने के बाद मेरी मुलाकात हुई थी दिल्ली में। खैर, समय तय हुआ। मैं पहुँच गया। स्वागत बहुत जोरदार हुआ।

मैं कंफ्यूज था। समझ नहीं आ रहा था कि कश्मीर को लेकर जो हम हिंदुस्तानी सोच रहे थे, वह सही है या यह, जो मैं देख रहा हूँ। अब मैं इमरान साहब के सामने था। खैर-मकदम के बाद उन्होंने कुछ देर क्रिकेट, भारत, पाकिस्तान की बातें कीं। फिर मैंने पूछा-जम्मू-कश्मीर से 370 हटने के बाद पाकिस्तानी चैनल्स बड़े चिंतित हैं। चीख रहे हैं भारत की अवाम के ख़िलाफ़, हमारी सरकार के खिलाफ।

हिंदुस्तान में तो यह भी चर्चा है कि आप भी काफी ख़फ़ा हैं मोदी सरकार के इस कदम से। बोले-हाँ, ख़फ़ा तो हूँ लेकिन कर क्या सकता हूँ। मोदी जी ने तो मोटा भाई को लगा दिया है मेरी बैंड बजाने के लिए। वह बजा रहा है। देश अलग नहीं जीने दे रहा है। सेना भी सुबह-शाम पानी भर रही है। वह बाजवा, जब न तब धमकी देता रहता है। आतंकवादी भाई तो चौके-छक्के वाली बाल की तरह उछल रहे हैं।
पुराने दोस्त हो इसलिए दिल का हाल बता रहा हूँ।

मोदी जी ने जो मेरी लंका लगाई है न, अब तक किसी ने नहीं लगाई। सब कुछ सुकून से चल रहा था। अब उन्होंने लगा दी है तो सब पीछे पड़े हैं। मुझे तो अपना भविष्य अंधकार में दिख रहा है लेकिन क्या करूँ। जनता का हित देखते हुए चुप हूँ। हमारी इंटेलिजेंस भी अब काम नहीं कर पा रही है। भारत से सूचनाएँ लाने में इनके पसीने छूट रहे हैं। पूरी दुनिया हमारी ओर ही आंख तरेरे जा रही है। इतना बड़ा काण्ड हो गया कहीं से किसी ने समर्थन नहीं किया। कोई हमारे साथ खड़ा नहीं हुआ। अब तुम्हीं बताओ। मैं क्या करूँ।

मैंने कहा-मोदी जी से बात करके उन्हें मना क्यों नहीं लेते। पीओके, बलूचिस्तान जैसे इलाके ऑफर कर दीजिए। अब तुम मजे ले रहे हो-इमरान साहब ने कहा। मैंने कहा-मैं तो दोनों देशों के बीच शांति चाहता हूँ और मेरी नजर में यह समस्या हल भी हो सकती है। आप अपने आतंकी दोस्तों को शांत कर लो, चाहे गोली से या बातों से और सेना से कहो कि रोज-रोज सीज फायर का उल्लंघन न करें।

क्योंकि अब मोटा भाई के हाथ में इंडिया की आंतरिक सुरक्षा का जिम्मा है। उस बंदे के पास डोवल भी हैं। ये दोनों मिलकर वैसे ही घुस जाएँगे जैसे पटेल जी ने हैदराबाद में निज़ाम के विरोध के बाद भी सेना भेज दी थी। मोटा भाई तो मोदी जी को यह काम करके ही बताएंगे। इन्हें हल्के में नहीं लेना।

एक दिन मेरी बात हो रही थी मोटा भाई से। उनका बहुत बड़ा सपना है इंडिया को लेकर। वे वृहत्तर भारत का सपना लेकर चल रहे हैं। बैंड बजाने को तैयार हैं। आपके सावधान रहने का वक्त है। दोस्ती में ही बता रहा हूँ|
इमरान खान से कहा-सही कह रहे हो। मैं क्रिकेटर ही अच्छा था। पूरी दुनिया में सम्मान था। प्रधानमंत्री होने के बाद घर के अंदर से लेकर बाहर तक बैंड बजी हुई है। सब हमें केवल और केवल राय देते हैं। क्या दिन थे, जब हम एक क्रिकेटर के रूप में इंडिया घूमते थे। आज जाने पर ही लफड़ा है।

राजनयिक सम्बंध खत्म करने का दबाव था। कर दिया। फिर सबने कहा-व्यापारिक सम्बंध भी खत्म कर दो। वो भी कर दिया। इन्हें इतने से ही संतोष नहीं हुआ। समझौता एक्सप्रेस बंद करवा दिया। अब तो मेरा ये हाल है कि न घर में चल रही है और न ही देश में। मन में आ रहा है कि मैं भी कहीं चला जाऊं। या अल्लाह! किस मनहूस घड़ी में मैंने यह मुई कुर्सी संभाली थी। अब नहीं हो रहा मुझसे। ये आजवा-बाजवा किसी भी दिन मुझे लटका देंगे। मोदी जी और मोटा भाई भी नहीं सुनने को तैयार हैं। देश भी नहीं सुनने को तैयार हैं। सेना तो सुनती ही नहीं और आतंकी लफंगे तो अलग ही सरकार चला रहे हैं।

मैं क्या करूँ, यह कहते हुए इमरान साहब लिपट गए। बड़े असहज दिख रहे थे और मजबूर भी। मुझे तो बड़ी दया भी आ रही थी लेकिन जब तक मैं कुछ करता, ससुरी आँख खुल गई।

नोट-यह मौजूदा व्यवस्था पर व्यंग्य है| इसे दिल पर न लें| पढ़ें| अच्छा लगे तो लेखक का उत्साहवर्द्धन करें, नहीं तो पढ़ने के बाद शान्ति से पतली गली से मुस्कुराते हुए निकल लें|

7 comments

  1. अमित उपाध्याय

    काफी मजेदार लगा और पाकिस्तान की मौजूदा परिस्थितियों की ये हकीकत भी है।

    • बहुत आभार प्रिय अमित| आपके शब्दों ने मुझमें नई उर्जा का संचार किया है| पुनः आभार| बहुत शुभकामनाएँ

    • Dear sir , Dinesh Pathak ji
      –> Aapki Story Padhkar mujhe bhut
      Anand aya.
      –> But end me padhne ke bad Hume kuch asa
      nhi laga ki ye koi story but asa lag rha hai ki
      such me Pakistan walo ki asi stage as gai
      hai.
      –> Bhagwan kre aap ase achi achi story ka
      uccharan krte aur aap ek mahan Guru hai.
      Thank u sir

    • बहुत आभार प्रिय अमित

  2. प्रिय दिनेश पाठक जी
    बहुत खूबसूरत व्यंग लिखा है, आपकी कल्पना की दाद देनी होगी। पूरी रचना पाकिस्तान की वर्तमान परिस्थिति के अनुरूप है।
    पढ़ कर आनंद आया। धन्यवाद।
    राजेंद्र सैनी

    • बहुत बहुत आभार आदरणीय| आपके शब्दों ने मूलतः मुझ पाठक को और लेखन के प्रति प्रेरित किया| मैं जीवन भर आभारी रहूँगा| कृपया मेरा सादर नमस्कार स्वीकार करें| सादर, दिनेश पाठक

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