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उम्मीद 21: इत्ती सी उम्र और ऐसी समझ पर भला कौन न इतराए

टीना की मुसीबत बढ़ती ही जा रही है| फैक्ट्री में आग लगने के बाद पापा जेल में हैं| घायलों का इलाज चल रहा है| मृत दो कर्मचारियों के परिवारों की देखरेख भी हो रही है| टीना खुद रोज अस्पताल और मृतजन के घर जा रही है, जिससे उनकी समस्याओं का निदान होता रहे| इंटर में पढाई करने वाली टीना का यह रूप कर्मचारियों को खूब भा रहा है| उसके मृदुभाषी होने की वजह से ही फैक्ट्री में दोबारा उत्पादन की तैयारियाँ शुरू हो गई थीं कि अचानक कर्मचारी आन्दोलन शुरू हो गया| टीना अस्पताल में घायलों की देखरेख कर रही थी, जब उसे आन्दोलन की जानकारी मिली|

लोगों के मना करने के बावजूद टीना ने तुरंत फैक्ट्री जाने का फैसला किया| वहाँ पहुँचने पर नजारा बदला हुआ था| फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूर बाहर खड़े थे| टीना ने बात करने की कोशिश की लेकिन नेताओं ने यह कहकर बात करने से मना कर दिया कि बच्चों से क्या बात करना? पापा के खिलाफ नारे सुनते हुए टीना घर आ गई| उसने दादी से बात की| पूरा वाकया विस्तार से बताया और मदद माँगी| दादी ने फूल सी पोती को गले लगाया तो वह फफक पड़ी| बोली-ये परेशानियाँ एक साथ मेरे ही घर में क्यों आ गई? हम सामना भी कर रहे थे और लगने लगा था कि सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा, पर ये आन्दोलन? इन्हें भी पता है कि फैक्ट्री चलेगी तो उसमें सभी का भला है लेकिन वे तो सुनने को ही तैयार नहीं है| दादी ने कहा-तुम एक बार इस मसले पर पापा से बात कर लो|

मुझे इस समस्या की पेचीदगियाँ बिल्कुल नहीं पता हैं| हाँ, इतना मैं भी जानती हूँ कि फैक्ट्री बंद होने से सभी का नुकसान है और चलने में सभी का फायदा और यही बात हमें कर्मचारियों को बतानी होगी| आन्दोलनकारियों की जितनी मांगें हैं, उन सभी का रिश्ता पैसों से ही है| तुम घबराओ नहीं| चलो तुम्हारे पापा से मिलकर आते हैं फिर निकलेगा कोई न कोई रास्ता|

दादी-पोती जेल पहुँच गईं| सारी जानकारी देने के बाद टीना यहाँ भी इमोशनल हो गई| पापा ने ढाढस बंधाया| बोले-मेरी लाडली ने जिस तरह बहुत सारी समस्याओं का सामना किया है, ठीक वैसे ही आन्दोलन से भी निपट लेगी| परेशान होने की जरूरत नहीं है| फैक्ट्री के जीएम सुनील जी से कल बात कर लेना| वे आज मुझे मिलने आने ही वाले हैं| टीना वापस आ गई और अगली सुबह उसने सुनील अंकल को फोन कर लिया| तय प्रोग्राम के मुताबिक टीना अपनी दोस्त सुरभि के साथ फैक्ट्री पहुँची| जीएम ने कर्मचारी नेताओं से बातचीत कर ली थी| चार कर्मचारी नेता टीना से बातचीत को राजी हुए| टीना ने पहले उन्हें धैर्यपूर्वक सुना| फिर अपनी कहना शुरू किया|

टीना ने इनसे अनुरोध किया कि वह कोई भी बात अकेले में नहीं करना चाहती| टीना उसी मंच से अपनी बात रखना चाहती थी, जिससे आन्दोलन चल रहा है| ना-नुकर के बाद नेताजन तैयार हो गए| टीना पहुँची| सबसे पहले उन सभी कर्मचारियों को नाम लेकर उसने नमस्ते किया, जिसे वह पहले से जानती है| बाकी सभी को एक साथ हाथ जोड़कर टीना ने अभिवादन किया| तमाम परेशानियों के बावजूद उसकी यह विनम्रता कर्मचारियों के दिल को छू गई| सबने एक सुर में कहा-हमारी बिटिया अपनी बात कहे| हम सुनेंगे जरुर| टीना को लगा कि आधी जंग तो उसने जीत ली|

टीना ने कहा-आपमें से बहुतों के सामने मैं पैदा हुई| आप ही में से किसी ने हमें स्कूल छोड़ा तो किसी ने जरूरत पड़ने पर अस्पताल भी पहुँचाया| अभी जब मैं पटाखों से जली थी तो आपमें से कई ने बिना कुछ खाए अस्पताल में ही रातें काट दी थीं, मुझे यह भी पता है| यहाँ मौजूद हममें से ज्यादतर के घर इसी फैक्ट्री से चलते हैं और आगे भी चलने वाले हैं| ऐसा कहते हुए टीना के चेहरे पर गजब का आत्मविश्वास था|

उसने कहा-पापा जेल में हैं| मम्मी को यहाँ के बारे में कुछ भी नहीं पता| मैं, दादी और यहाँ मौजूद आप सबको ही तय करना है कि फैक्ट्री में काम शुरू हो या नहीं| अगर यह आन्दोलन हम सबको फायदा पहुंचाने वाला साबित हो तो पुख्ता तौर पर होना चाहिए और मैं भी इसका हिस्सा बनना चाहूँगी| लेकिन अगर यह हमारे हित में नहीं है तो हमें एकजुट होकर फैक्ट्री का काम शुरू करना होगा| मुझे लगता है कि इसी में सबकी भलाई है| बाकी आप लोगों की मर्जी| टीना जब यह सब कह रही थी तो अजब सी शांति थी|

बाहरी नेता खुद को अलग-थलग पा रहे थे| अपनी बात कहकर टीना सबको यथोचित अभिवादन के बाद चल पड़ी तो भीड़ से एक बुजुर्ग आगे आए| टीना के सिर पर हाथ रखकर ढेर सारा आशीष दिया| बोले प्रभु तुम्हें कामयाब करे| बिटिया खूब तरक्की करे| पापा जल्दी से जेल से बाहर आएं और फैक्ट्री भी जल्दी से जल्दी चालू हो| टीना मुस्कराई और वहाँ से चल पड़ी| शाम को उसे कुछ कर्मचारी घर मिलने भी आए| सबने कहा कि वे अपनी बिटिया के साथ हैं| आन्दोलन भी खत्म होगा और फैक्ट्री भी चलेगी| बस, थोड़ा धैर्य रखो|

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