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उम्मीद 20 : जवानों की शहादत, टीना का प्रण और दादी के तर्क

कश्मीर में बड़ी संख्या में हुई जवानों की शहादत ने दादी को झकझोर दिया| शाम को जैसे ही यह सूचना उन्हें मिली वे बेचैन हो उठीं| शहीदों की संख्या में पल-पल हो रहे इजाफे की वजह से दादी ने रात का खाना भी नहीं खाया| सो भी नहीं पाई| इसका असर टीना की इम्तहान की तैयारियों पर पड़ा| उसे कहानियाँ भी नहीं सुनने को मिली| दादी के चेहरे पर बेचैनी देख टीना ने जिद भी नहीं की| वह चुपचाप तैयारियों में लगी रही|

पर, भोर में टीना दादी के पास पहुँची| उनके सिर पर तेल ठोंकने लगी| दादी चौंकी और पूछा अरे मेरी लाडो अचानक दादी की सेवा में जुट गई| हाँ, मेरी दादी लाखों में एक है, इसलिए-टीना ने कहा| बोली-आप रात से ही बेचैन हो| सोई नहीं हो| इसी कमरे में इधर से उधर भटक रही हो| कुछ तो बात है| आप ने मुझे बीमारी से बाहर आने में मदद की| इम्तहान के लिए तैयार किया| ऐसे में दादी के सिर में तेल क्या, मैं कुछ भी कर सकती हूँ| टीना ने सवाल पूछा-दादी आपकी बेचैनी की वजह मैं समझ नहीं पाई| क्या शहीदों में अपना भी कोई है? मतलब? दादी ने पूछा…मतलब कोई रिश्तेदार आदि| नहीं-दादी ने कहा| फिर आप को क्यों बेचैन होना चाहिए| दादी ने कहा, ध्यान से सुनो-हम यहाँ अपने घरों में सुकून से सो पा रहे हैं तो देश के इन्हीं वीरों की वजह से| वे अपना घर-बार छोडकर पहाड़ों पर, बर्फ के बीच, रेगिस्तानों में रहकर हमारी और माँ भारती की रक्षा करते हैं| वे हमारे लिए इतना करते हैं तो उनके प्रति मेरी चिंता स्वाभाविक है| वे हमारे रिश्तेदार नहीं हैं लेकिन उनसे बढ़कर हैं| उनके लिए बरबस मेरे मन में भारी सम्मान है| आज भी बावर्दी दुरुस्त सेना का जवान दिखता है तो बरबस उसके सम्मान में नजरें झुक जाती है| छाती चौड़ी हो जाती है| माथे पर गर्व का भाव आ जाता है| बचपन में तो हम सेना के जवानों को देखते ही जय हिन्द भी बोला करते थे| श्रद्धा का वह भाव आज भी कायम है|

टीवी चैनल चिल्ला-चिल्ला कर पाकिस्तान को दोषी ठहरा रहे हैं? देश में गुस्सा और गम है, तो क्या हमारी सेना पाकिस्तान पर हमला कर देगी? इसकी असली वजह आप क्या देखती हो? टीना ने दादी से पूछा| टीवी चैनल वालों को असल में केवल सूचना देनी चाहिए लेकिन आजकल वे फैसले सुनाने लगे हैं, जो गलत है| चीखने की प्रतियोगिता चल रही है चैनलों पर, यह भी गलत है| आपका काम देश की जनता को सूचना देना है, भड़काना नहीं लेकिन ये टीवी चैनल वाले यह काम भी बखूबी कर रहे हैं| मेरी नजर में पाकिस्तान दोषी हो भी तो भी हमला इसका विकल्प नहीं है| यह सच है कि पाकिस्तान हमें लगातार नुकसान पहुँचा रहा है| उसकी गोद में पल रहे आतंकी कश्मीरियों की गरीबी का फायदा उठाकर उन्हें बरगला रहे हैं| युद्ध दोनों ही देशों के लिए नुकसान का सौदा है| हमारा संविधान भी पहले हमले न करने की बात करता है|

ऐसे में उचित यह होगा कि हम पहले देश के अंदर बैठे दुश्मनों को बीन-बीन कर ठीक करें| अपनी कमजोरियों को चिन्हित कर उन्हें मजबूत करें| इसके लिए केंद्र सरकार और देश के सभी राजनीतिक दलों को आगे आकर इससे निपटना होगा| कश्मीर हमारा जरुर है लेकिन हम वहाँ जाकर दो गज जमीन खरीदकर कोई व्यापार नहीं कर सकते| कश्मीर की कोई बेटी हमारी बहू बन जाए तो उसके तमाम अधिकार ख़त्म हो जाते हैं जबकि पाकिस्तान की बहू बनने पर उसके सारे अधिकार महफूज हैं| पूरे देश का औद्योगिक विकास हो रहा है लेकिन कश्मीर का नहीं| अगर वहाँ कारखाने लगें तो स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा| वे देश की मुख्यधारा में शामिल होंगे| हमारी तरह सोचेंगे| आज भी वहाँ भारतीय दंड संहिता नहीं लागू है| वहाँ की विधान सभा का कार्यकाल छह साल है, बाकी पूरे देश का पाँच साल| आज भी कश्मीर में देश का झंडा तो इस्तेमाल होता ही है, लेकिन कश्मीर का झंडा भी लगता है|

हम अगर एक देश की बात करते हैं तो नियम-कानून भी तो एक होना चाहिए न-दादी ने सवाल किया| टीना ने कहा-जी लेकिन ऐसा हुआ क्यों दादी? ये सब मुए नेताओं की वजह से है| जब देश आजाद हुआ तभी कुछ ऐसी चीजें हो गई थीं, जिसका भुगतान हम आज भी कर रहे हैं| संविधान में तमाम संसोधन हुए लेकिन अभी भी बहुत कुछ ऐसा है जो किया जाना शेष है| कश्मीर के लिए पूरा देश खुला हुआ है लेकिन देश के लिए कश्मीर नहीं| वहाँ हम घूमने जा सकते हैं, बस| अब समय आ गया है कि तमिलनाडु, केरल और अन्य राज्यों की तरह कश्मीर भी बना दिया जाए| बहुत सारी चीजें खुद-ब-खुद दुरुस्त हो जाएँगी| दादी ने सलाह दी-सेना का सम्मान, सेना के जवानों-अफसरों का सम्मान हमें उसी तरह करना है, जैसे हम देश का करते हैं| शहीदों का सम्मान करते हुए हमें उनके परिवारों की मदद भी करनी है और उन्हें अपना भाई, पिता, बेटा भी मानते रहना है| दादी आपने मेरी आँखें खोल दीं| अब इम्तहान ख़त्म होते ही मैं कश्मीर के बारे में और पढूंगी| और अपनी सेविंग्स का अगला मेजर हिस्सा देश की वीरों को दान करूँगी| जय हिन्द, जय भारत|

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