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उम्मीद 19 : छोटी सी टीना और ऐसे इरादे, भला कौन न इतराए!

रात का समय था| इम्तहान की तैयारियों के बीच टीना दादी से कहानियाँ सुने बगैर सोने को तैयार नहीं थी| दादी ने अपने जमाने की छोटी-छोटी बचत से बड़े-बड़े काम वाली कहानी सुनाई तो टीना मन ही मन प्रसन्न हो गई| क्योंकि उसने इस बचत की शुरुआत कई बरस पहले कर दी थी| अपनी पॉकेट मनी से ही टीना ने गुल्लक खरीदा था दीवाली के मेले से, जब वह छठीं में थी| उसमें आए दिन कुछ न कुछ जमा होता है, एक रुपया तक भी जमा करने में टीना ने संकोच नहीं किया|

जब यह खुलासा टीना ने किया तो दादी बरबस प्यार उड़ेलने लगीं| बोलीं-तुममे पूरे अंश मेरे हैं| तुम बहुत तरक्की करोगी| दादी ने पूछा-बचत की यह आदत तुम्हें कहाँ से और कैसे लगी, बताओ तो जरा| टीना ने कहा-बहुत पुरानी बात है| मैं और सुरभि रामू काका के साथ दीवाली पर खिलौने लेने बाजार गए थे| सुरभि का गुल्लक फूट गया था| उसने अपने लिए लिया तो मैंने भी खरीद लिया| घर लाकर चुपचाप मैंने उसे आलमारी में छिपा दिया| काफी दिनों तक तो उसमें कुछ जमा न हो पाया लेकिन मुझे चिंता थी कि इस गुल्लक में अब कुछ जमा भी होना चाहिए| फिर पहले महीने मैंने सौ रुपए जमा किए| अगले महीने कुछ फुटकर पैसे और डाले| धीरे-धीरे आदत सी पड़ गई| अब तो पॉकेट मनी का ज्यादातर हिस्सा इसी गुल्लक में जाता है| कई बार तो मम्मी-पापा से भी कुछ पैसे लेकर चुपचाप मैं इसमें डालती हूँ| 10-20 रुपए आसानी से कभी भी मिल जाते हैं|

टीना ने जोड़ा-इस गुल्लक को मैं तब तोडूंगी जब पापा-मम्मी की शादी की 21वीं सालगिरह होगी| उन्हें इससे मैं गिफ्ट खरीदूंगी महंगा वाला| वे दोनों मेरी ख़ुशी के लिए न जाने क्या-क्या करते हैं तो भला मैं क्यों नहीं? दादी टीना के मुँह से यह किस्सा सुनते हुए मन ही मन खुश होती रहीं| और हों भी क्यों न? उन्हें उनकी पोती ने यह अधिकार जो दिया है| टीना ने दादी से कहा-सालगिरह पर गिफ्ट देने का खुलासा वे मम्मी-पापा से न करें| नहीं तो यह सरप्राइज नहीं रह जाएगा| दादी ने कहा-पक्का, किसी से साँस तक नहीं लूँगी लेकिन तुमने यह किस्सा बता कर मेरा दिल जीत लिया| दादी ने फिर सवाल किया-गुल्लक टूट जाएगा| सारा पैसा खर्च हो जाएगा फिर आगे की बचत कैसे होगी और किस काम के लिए? टीना ने कहा-एक गुल्लक उसके पास और है| उसमें भी हर महीने कुछ पैसे मैं जमा करती हूँ| यह गुल्लक तब टूटेगा जब सुरभि को कहीं कॉलेज जाना होगा| वह मेरी सबसे अच्छी दोस्त है और उसके पापा भी नहीं हैं इस दुनिया में| सुरभि की मम्मी को 10 हजार रुपए सेलरी मिलती है| अब इतने पैसे में भला वे उसे कैसे कॉलेज भेज पाएंगी? मेरी नजर में यह एक बहुत बड़ा काम होगा| सो तो है-दादी ने कहा|

पोती को मम्मी-पापा और दोस्त सुरभि के बारे में इतना सोचता देखकर दादी बोलीं-सुरभि की मदद में उस गुल्लक से जीतनी रकम निकलेगी, उतनी ही दादी मिला देंगी| बस अब एक काम यह करो कि गुल्लक में जमा रकम निकाल कर इसे बैंक में जमा कर दो| वहाँ ब्याज भी मिलेगा| स्टूडेंट्स के लिए सभी बैंक जीरो बैलेंस खाता खोलते हैं| दादी-पोती सुबह बैंक पहुँच गईं| दोनों ही गुल्लक की रकम अलग-अलग गिनी गई और बैंक में इन्हें बचत खाते में जमा किया गया और फिर फिक्स डिपाजिट बनवा दिया| मम्मी-पापा वाले गुल्लक में बीते छह वर्षों में 26 हजार से कुछ ज्यादा और सुरभि के गुल्लक में 22 हजार से कुछ ज्यादा रकम मिली| दादी ने तीन हजार मिलाकर सुरभि के लिए 25 हजार की एफडी बनवा दी और चार हजार मिलाकर 30 हजार की एक और एफडी बनवा दी| 25 हजार की एफडी में टीना ने सुरभि को ही नॉमिनी बनाया और 30 हजार वाली में मम्मी को| बैंक से लौटते हुए दादी ने फिर से दो गुल्लक दिलवा दिए टीना को, जिससे बचत की उसकी आदत बनी रहे| दादी ने टीना को इस नेक काम का इनाम देने की इच्छा जताई तो उसने कहा-आप अपने आप में ईनाम हो दादी| मुझे कुछ नहीं चाहिए| आपके साथ होने से मैं जल्दी ठीक हो गई| जो बोर्ड्स की परीक्षा छूटने का भय था, अब मैं हर हाल में दूँगी और अच्छे नंबरों से पास भो हो जाऊँगी| सलोनी मैम की मेहनत, सुरभि का जरूरत से ज्यादा सपोर्ट और आपका पसीना व्यर्थ नहीं जाने दूँगी| देख लेना आप| हाँ-हाँ दादी अम्मा| अब चुप भी हो जाओ| कुछ ले लो| दादी बहुत कंजूस है| रोज-रोज पैसे नहीं खर्च करती| अच्छा ठीक है तो एक आइसक्रीम मैं लूँगी-टीना ने कहा| दादी ने पैसे दिए और टीना ने फटाफट आइसक्रीम खरीदी और खाते हुए घर आ गई|

उन्होंने चुपचाप बेटे-बहू को टीना की बचत की आदत बताई| इरादे बताए तो दोनों खुश हो गए| पापा ने कहा-माँ, टीना कहीं बड़ी तो नहीं हो गई? इत्ती से उम्र और ऐसी सोच, मेरी नजर में तो वह बहुत ऊपर आ गई| जितना भी पैसा उसने बैंक में जमा किया है, उतना ही मैं भी एफडी करा देता हूँ| प्रभु से विनती है कि वे टीना को ऐसे ही विचारों से ओतप्रोत रखें|

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