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हाय सर, बाई द वे आई एम रिया!

वाकया हाल ही का है| व्हाट्सएप पर एक अनजाने नंबर से सन्देश आया..हाय सर| मैंने लिखा-यस प्लीज| सन्देश का क्रम आगे बढ़ा-मुझे किसी ने आपका नम्बर दिया है| कहा गया है कि आप नौकरी दिलवाने में मददगार हो सकते हैं| मैंने जवाब दिया-आपको डांटने का मन कर रहा है| आप कौन हैं? कहाँ से लिख रहे हैं या लिख रही हैं? आप की शैक्षिक योग्यता क्या है? अपने बारे में कुछ बताएँ, यह भी जानकारी दें कि किसके माध्यम से आप मुझे लिख रहे हो| जो जवाब आया, उससे मैं खुद भौचक रह गया| क्यों कि अगला सन्देश बेहद खतरनाक था| लिखा गया-आपने पूछा ही नहीं-बाई द वे, आई एम रिया|दिनेश पाठकमैं ऐसा मानता हूँ कि हमारे देश का युवा ज्यादा होशियार है| चपल है| पुरानी पीढ़ी से कहीं ज्यादा अच्छा सोचता-समझता है, पर जब इस तरह का संवाद होने पर निराशा संभव है और मैं इसे अपवाद ही मानता हूँ| इस घटना का उल्लेख करने के पीछे मेरी मंशा रिया या उसकी तरह का व्यवहार करने वाले किसी भी नौजवान की गलती गिनाना नहीं है| केवल ध्यान दिलाना है कि अगर आपको किसी से मदद चाहिए हो तो क्या इस तरीके से मदद मिल सकती है? मुझे लगता है कि नहीं| यह घटना बहुत कुछ सीख देती है| मैं जज तो नहीं हूँ लेकिन यहाँ मुझे यह लिखने में भी कोई संकोच नहीं कि रिया गलत है| अगर आप को किसी से कुछ चाहिए तो विनम्रता पहली शर्त है| यह तब और जरुरी हो जाता है, जब सामने वाला आपके बारे में कुछ नहीं जानता| आप भी उसके बारे में कुछ नहीं जानते अलावा इसके कि आपके किसी जानने वाले ने आपको एक नंबर दे दिया| ऐसे में किसी नौजवान की भूमिका क्या होनी चाहिए| मैं केवल इसी बिंदु पर अपनी बात रखने का प्रयास कर रहा हूँ| सहमति/ असहमति हो सकती है|यह ध्यान रखना जरुरी है कि हमारे देश में इस समय बेरोजगारों की संख्या विस्फोटक स्तर तक पहुँच गई है| लगभग 14 करोड़ पंजीकृत बेरोजगार हैं इस समय देश में| मेरा मानना है कि यह संख्या इससे कहीं ज्यादा भी हो सकती है| आने वाले 10 वर्षों में यह स्थिति बहुत अराजक होने को है क्योंकि नौकरियों के अवसर लगातार कम हो रहे हैं| बेरोजगार तेजी से बढ़ रहे हैं| यह स्थिति ठीक वैसी ही बनती जा रही है जैसे अपने देश में अमीर-गरीब के बीच खाई तेजी से बढ़ रही है| ऐसे में नौजवान को बहुत संवेदनशील होना है| अपनी अप्रोच दुरुस्त करनी है| मैं अगर रिया की जगह पर होता तो हाय सर लिखने के तुरंत बाद अपना नाम, शैक्षिक योग्यता, अनुभव, अपने शहर या गाँव का नाम लिखता| फिर जिन सज्जन से नंबर मिला, उनका नाम लिखता| उसके बाद नौकरी की बात करता| मिलने का समय मांगता| क्योंकि आमने-सामने बैठकर एक-दूसरे के बारे में जानना बेहतर होता है| इसके बाद अगर सामने वाला मेरी कोई भी मदद करने की स्थिति में होता तो जरुर करने का प्रयास करता| अगर मुझसे सहमत होता और तुरंत जगह नहीं भी होती तो कहीं और भेज देता या फिर कुछ दिन बाद दोबारा मिलने के लिए कहता| पर, रिया ने केवल अपना नाम बता इतिश्री कर ली| मेरी नजर में किसी भी नौजवान के लिए यह उचित कदम नहीं हो सकता| ध्यान यह रखना है कि काम आपको चाहिए तो अपने बारे में आपको ही बताना पड़ेगा| तभी तो सामने वाला कुछ फैसला ले पाएगा| मेरी देश की युवा पीढ़ी से विनती है कि अगर आपको किसी से कुछ भी पाना है तो पहले उसे अपने बारे में जरुर बताएँ| वो कहते हैं न-फर्स्ट इम्प्रेशन इस लास्ट इम्प्रेशन| कृपया रिया की तरह न लिखें| हो सकता है कि रिया व्यक्तिगत तौर पर बहुत योग्य हो| बातचीत बहुत अच्छा करती हो| किन्हीं हालातों से उसके पास आज नौकरी न हो इसलिए वह ऐसा व्यवहार अनजाने में कर गई हो लेकिन सामने वाला जब आपके बारे में कुछ भी नहीं जानता तो उसे स्वप्न तो नहीं आएगा| बताना खुद को ही पड़ेगा| यूँ भी देश में इतनी बेरोजगारी भले हो लेकिन अच्छे लोगों की भारी कमी बनी हुई है| जिनके पास समझ है, शिक्षा है, उनके सामने दिक्कतें न के बराबर हैं| और हाँ, ध्यान देने वाली बात यह भी है कि हमारी समझ का फैसला टेस्ट की कापियाँ, इंटरव्यू के दौरान हमारा व्यवहार, प्रस्तुतीकरण और काम के दौरान सहकर्मियों के साथ संवाद कैसा है, इस पर होता है न कि हमारे सोचने-समझने से| कहने का मतलब अगर सीनियर्स आपको अच्छा मानते हैं तो ही आप अच्छे हैं| मतलब आपको उस फोर्मेंट में काम करना है जो आपका संस्थान चाहता है| मैं अपने 27 वर्ष के तजुर्बे के आधार पर कह सकता हूँ कि हर टीम लीडर को काम करने वाले लोग ही पसंद हैं| अपवाद हर जगह होते हैं, संभव है, यहाँ भी हों|